नीति वचन 2:1

हे मेरे पुत्रा, यदि तू मेरे वचन ग्रहण करे, और मेरी आज्ञाओं को अपने हृदय में रख छोड़े,

प्रसंग सहित पढ़ें · नीति वचन 2

1हे मेरे पुत्रा, यदि तू मेरे वचन ग्रहण करे, और मेरी आज्ञाओं को अपने हृदय में रख छोड़े,

2और बुद्धि की बात ध्यान से सुने, और समझ की बात मन लगाकर सोचे;

3और प्रवीणता और समझ के लिये अति यत्न से पुकारे,

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