हम मोल लेकर पानी पीते हैं, हम को लकड़ी भी दाम से मिलती है।
2हमारा भाग परदेशियों का हो गया ओर हमारे घर परायों के हो गए हैं।
3हम अनाथ और पिताहीन हो गए; हमारी माताएं विधवा सी हो गई हैं।
4हम मोल लेकर पानी पीते हैं, हम को लकड़ी भी दाम से मिलती है।
5खदेड़नेवाले हमारी गर्दन पर टूट पडे हैं; हम थक गए हैं, हमें विश्राम नहीं मिलता।
6हम स्वयं मिस्र के अधीन हो गए, और अश्शूर के भी, ताकि पेेट भर सकें।
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