क्योंकि पक्षी के देखते हुए जाल फैलाना व्यर्थ होता है;
15तो, हे मेरे पुत्रा तू उनके संग मार्ग में न चलना, वरन उनकी डगर में पांव भी न धरना;
16क्योंकि वे बुराई की करने को दौड़ते हैं, और हत्या करने को फुर्ती करते हैं।
17क्योंकि पक्षी के देखते हुए जाल फैलाना व्यर्थ होता है;
19सब लालचियों की चाल ऐसी ही होती है; उनका प्राण लालच ही के कारण नाश हो जाता है।।
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