धर्म खरी चाल चलनेवाली की रक्षा करता है, परन्तु पापी अपनी दुष्टता के कारण उलट जाता है।
4आलसी का प्राण लालसा तो करता है, और उसको कुछ नहीं मिलता, परन्तु कामकाजी हृष्ट पुष्ट हो जाते हैं।
5धर्मी झूठे वचन से बैर रखता है, परन्तु दुष्ट लज्जा का कारण और लज्जित हो जाता है।
6धर्म खरी चाल चलनेवाली की रक्षा करता है, परन्तु पापी अपनी दुष्टता के कारण उलट जाता है।
7कोई तो धन बटोरता, परन्तु उसके पास कुछ नहीं रहता, और कोई धन उड़ा देता, तौभी उसके पास बहुत रहता है।
8प्राण की छुड़ौती मनुष्य का धन है, परन्तु निर्धन घुड़की को सुनता भी नहीं।
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