आकाश की ओर दृष्टि करके देख; और आकाशमणडल को ताक, जो तुझ से ऊंचा है।
3जो तू कहता है कि मुझे इस से क्या लाभ? और मुझे पापी होने में और न होने में कौन सा अधिक अन्तर है?
4मैं तुझे और तेरे साथियों को भी एक संग उत्तर देता हूँ।
5आकाश की ओर दृष्टि करके देख; और आकाशमणडल को ताक, जो तुझ से ऊंचा है।
7यदि तू धम है तो उसको क्या दे देता है; वा उसे तेरे हाथ से क्या मिल जाता है?
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