ओबद्दाह 1:4

कौन मुझे भूमि पर उतार देगा? परन्तु चाहे तू उकाब की नाईं ऊंचा उड़ता हो, वरन तारागण के बीच अपना घोंसला बनाए हो, तौभी मैं तुझे वहां से नीचे गिराऊंगा, यहोवा की यही वाणी है।।

प्रसंग सहित पढ़ें · ओबद्दाह 1

2उठो! हम उस से लड़ने को उठें! मैं तुझे जातियों में छोटा कर दूंगा, तू बहुत तुच्छ गिना जाएगा।

3हे पहाड़ों की दरारों में बसनेवाले, हे ऊंचे स्थान में रहनेवाले, तेरे अभिमान ने तुझे धोखा दिया है; तू मन में कहता है,

4कौन मुझे भूमि पर उतार देगा? परन्तु चाहे तू उकाब की नाईं ऊंचा उड़ता हो, वरन तारागण के बीच अपना घोंसला बनाए हो, तौभी मैं तुझे वहां से नीचे गिराऊंगा, यहोवा की यही वाणी है।।

5यदि चोर- डाकू रात को तेरे पास आते, (हाय, तू कैसे मिटा दिया गया है!) तो क्या वे चुराए हुए धन से तृप्त होकर चले न जाते? और यदि दाख के तोड़नेवाले तेरे पास आते, तो क्या वे कहीं कहीं दाख न छोड़ जाते?

6परन्तु एसाव का धन कैसे खोजकर लूटा गया है, उसका गुप्त धन कैसे पता लगा लगाकर निकाला गया है!

ओबद्दाह 1 पूरा पढ़ें

इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें

KJV தமிழ் తెలుగు ಕನ್ನಡ