मैं उसके साम्हने अपना मुक़ मा पेश करता, और बहुत से प्रमाण देता।
2मेरी कुड़कुड़ाहट अब भी नहीं रूक सकती, मेरी मार मेरे कराहने से भारी है।
3भला होता, कि मैं जानता कि वह कहां मिल सकता है, तब मैं उसके विराजने के स्थान तक जा सकता !
4मैं उसके साम्हने अपना मुक़ मा पेश करता, और बहुत से प्रमाण देता।
5मैं जान लेता कि वह मुझ से उत्तर में क्या कह सकता है, और जो कुछ वह मुझ से कहता वह मैं समझ लेता।
6क्या वह अपना बड़ा बल दिखाकर मुझ से मुक़ मा लड़ता? नहीं, वह मुझ पर ध्यान देता।
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें