मित्रा सब समयों में प्रेम रखता है, और विपत्ति के दिन भाई बन जाता है।
15जो दोषी को निर्दोष, और जो निर्दोष को दोषी ठहराता है, उन दोनों से यहोवा घृणा करता है।
16बुद्धि मोल लेने के लिये मूर्ख अपने हाथ में दाम क्यों लिए हैं? वह उसे चाहता ही नहीं।
17मित्रा सब समयों में प्रेम रखता है, और विपत्ति के दिन भाई बन जाता है।
18निर्बुद्धि मनुष्य हाथ पर हाथ मारता है, और अपने पड़ोसी के सामने उत्तरदायी होता है।
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