तेरा मन क्यों तुझे खींच ले जाता है? और तू आंख से क्यों सैन करता है?
10हम लोगों में तो पक्के बालवाले और अति पुरनिये मनुष्य हैं, जो तेरे पिता से भी बहुत आयु के हैं।
11ईश्वर की शान्तिदायक बातें, और जो वचन तेरे लिये कोमल हैं, क्या ये तेरी दृष्टि में तुच्छ हैं?
12तेरा मन क्यों तुझे खींच ले जाता है? और तू आंख से क्यों सैन करता है?
13तू भी अपनी आत्मा ईश्वर के विरूद्ध करता है, और अपने मुंह से व्यर्थ बातें निकलने देता है।
14मनुष्य है क्या कि वह निष्कलंक हो? और जो स्त्री से उत्पन्न हुआ वह है क्या कि निदष हो सके?
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें