उन में यहूदा की सन्तान से चुने हुए, दानिरयेल, हनन्याह, मीशाएल, और अजर्याह नाम यहूदी थे।
4जो निर्दोष, सुन्दर और सब प्रकार की बुद्धि में प्रवीण, और ज्ञान में निपुण और विद्वान् और राजमन्दिर में हाजिर रहने के योग्य हों; और उन्हें कसदियों के शास्त्रा और भाषा की शिक्षा दे।
5और राजा ने आज्ञा दी कि उसके भोजन और पीने के दाखमधु में से उन्हें प्रतिदिन खाने- पीने को दिया जाए। इस प्रकार तीन वर्ष तक उनका पालन पोषण होता रहे; तब उसके बाद वे राजा के साम्हने हाजिर किए जाएं।
6उन में यहूदा की सन्तान से चुने हुए, दानिरयेल, हनन्याह, मीशाएल, और अजर्याह नाम यहूदी थे।
7और खोजों के प्रधान ने उनके दूसरे नाम रखें; अर्थात् दानिरयेल का नाम रखे; अर्थात् दानिरयेल का नाम उस ने बेलतशस्सर, हनन्याह का शद्रक, मीशाएल का मेशक, और अजर्याह का नाम अबेदनगो रखा।।
8परन्तु दानिरयेल ने अपने मन में ठान लिया कि वह राजा का भोजन खाकर, और उसके पीने का दाखमधु पीकर अपवित्रा न होए; इसलिये उस ने खोजों के प्रधान से बिनती की कि उसे अपवित्रा न होना पड़े।
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