जब येहू यिज्रैल को आया, तब ईज़ेबेल यह सुन अपनी आंखों में सुर्मा लगा, अपना सिर संवारकर, खिड़की में से झांकने लगी।
28तब उसके कर्मचारियों ने उसे रथ पर यरूशलेम को पहुंचाकर दाऊदपुर में उसके पुरखाओं के बीच मिट्टी दी।
29अहज्याह तो अहाब के पुत्रा योराम के ग्यारहवें वर्ष में यहूदा पर राज्य करने लगा था।
30जब येहू यिज्रैल को आया, तब ईज़ेबेल यह सुन अपनी आंखों में सुर्मा लगा, अपना सिर संवारकर, खिड़की में से झांकने लगी।
31जब येहू फाटक में होकर आ रहा था तब उस ने कहा, हे अपने स्वामी के घात करने वाले जिम्री, क्या कुशल है?
32तब उस ने खिड़की की ओर मुंह उठाकर पूछा, मेरी ओर कौन है? कौन? इस पर दो तीन खोजों ने उसकी ओर झांका।
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