नम्रता और यहोवा के भय मानने का फल धन, महिमा और जीवन होता है।
2धनी और निर्धन दोनों एक दूसरे से मिलते हैं; यहोवा उन दोनों का कर्त्ता है।
3चतुर मनुष्य विपत्ति को आते देखकर छिप जाता है; परन्तु भोले लोग आगे बढ़कर दण्ड भोगते हैं।
4नम्रता और यहोवा के भय मानने का फल धन, महिमा और जीवन होता है।
6लड़के को शिक्षा उसी मार्ग की दे जिस में उसको चलना चाहिये, और वह बुढ़ापे में भी उस से न हटेगा।
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