उत्पत्ति 29:3

और जब सब झुण्ड वहां इकट्ठे हो जाते तब चरवाहे उस पत्थर को कुएं के मुंह पर से लुढ़काकर भेड़- बकरियों को पानी पिलाते, और फिर पत्थर को कुएं के मुंह पर ज्यों का त्यों रख देते थे।

प्रसंग सहित पढ़ें · उत्पत्ति 29

1फिर याकूब ने अपना मार्ग लिया, और पूर्व्वियों के देश में आया।

2और उस ने दृष्टि करके क्या देखा, कि मैदान में एक कुंआ है, और उसके पास भेड़- बकरियों के तीन झुण्ड बैठे हुए हैं; क्योंकि जो पत्थर उस कुएं के मुंह पर धरा रहता था, जिस में से झुण्डों को जल पिलाया जाता था, वह भारी था।

3और जब सब झुण्ड वहां इकट्ठे हो जाते तब चरवाहे उस पत्थर को कुएं के मुंह पर से लुढ़काकर भेड़- बकरियों को पानी पिलाते, और फिर पत्थर को कुएं के मुंह पर ज्यों का त्यों रख देते थे।

4सो याकूब ने चरवाहों से पूछा, हे मेरे भाइयो, तुम कहां के हो? उन्हों ने कहा, हम हारान के हैं।

5तब उस ने उन से पूछा, क्या तुम नाहोर के पोते लाबान को जानते हो ? उन्हों ने कहा, हां, हम उसे जानते हैं।

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