इनको अपनी आंखों की ओट न होने दे; वरन अपने मन में धारण कर।
19दुष्टों का मार्ग घोर अन्धकारमय है; वे नहीं जानते कि वे किस से ठोकर खाते हैं।।
20हे मेरे पुत्रा मेरे वचन ध्यान धरके सुन, और अपना कान मेरी बातों पर लगा।
21इनको अपनी आंखों की ओट न होने दे; वरन अपने मन में धारण कर।
23सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल द्दॊत वही है।
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