यशायाह 18:4

क्योंकि यहोवा ने मुझ से यों कहा है, धूप की तेज गर्मी वा कटनी के समय के ओसवाले बादल की नाईं मैं शान्त होकर निहारूंगा।

प्रसंग सहित पढ़ें · यशायाह 18

2और समुद्र पर दूतों को नरकट की नावों में बैठाकर जल के मार्ग से यह कहके भेजता है, हे फुर्तीले दूतो, उस जाति के पास जाओ जिसके लोग बलिष्ट और सुन्दर हैं, जो आदि से अब तक डरावने हैं, जो मापने और रौंदनेवाला भी हैं, और जिनका देश नदियों से विभाजित किया हुआ है।।

3हे जगत के सब रहनेवालों, और पृथ्वी के सब निवासियों, जब झंड़ा पहाड़ों पर खड़ा किया जाए, उसे देखो! जब नरसिंगा फूंका जाए, तब सुनो!

4क्योंकि यहोवा ने मुझ से यों कहा है, धूप की तेज गर्मी वा कटनी के समय के ओसवाले बादल की नाईं मैं शान्त होकर निहारूंगा।

5क्योंकि दाख तोड़ने के समय से पहिले जब फूल फूल चुकें, और दाख के गुच्छे पकने लगें, तब वह टहनियों को हंसुओं से काट डालेगा, और फैली हुई डालियों को तोड़ तोड़कर अलग फेंक देगा।

6वे पहाड़ों के मांसाहारी पक्षियों और वन- पशुओं के लिये इकट्ठे पड़े रहेंगे। और मांसाहारी पक्षी तो उनको नोचते नोचते धूपकाल बिताएंगे, और सब भांति के वनपशु उनको खाते खाते जाड़ा काटेंगे।

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