उस बुद्धि के लिये जिस में ज्ञान है यही अवसर है, वे सातों सिर सात पहाड़ हैं, जिन पर वह स्त्री बैठी है।
7उस स्वर्गदूत ने मुझ से कहा; तू क्यों चकित हुआ? मैं इस स्त्री, और उस पशु का, जिस पर वह सवार है, और जिस के सात सिर और दस सींग हैं, तुझे भेद बताया हूं।
8जो पशु तू ने देखा है, यह पहिले तो था, पर अब नहीं है, और अथाह कुंड से निकलकर विनाश में पड़ेगा, और पृथ्वी के रहनेवाले जिन के नाम जगत की उत्पत्ति के समय से जीवन की पुस्तक में लिखे नहीं गए, इस पशु की यह दशा देखकर, कि पहिले था, और अब नहीं; और फिर आ जाएगा, अचंभा करेंगे।
9उस बुद्धि के लिये जिस में ज्ञान है यही अवसर है, वे सातों सिर सात पहाड़ हैं, जिन पर वह स्त्री बैठी है।
10और वे सात राजा भी हैं, पांच तो हो चुके हैं, और एक अभी है; और एक अब तक आया नहीं, और जब आएगा, तो कुछ समय तक उसका रहना भी अवश्य है।
11और जो पशु पहिले था, और अब नहीं, वह आप आठवां है; और उन सातों में से उत्पन्न हुआ, और विनाश में पड़ेगा।
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