भजन संहिता 53:3

वे सब के सब हट गए; सब एक साथ बिगड़ गए; कोई सुकर्मी नहीं, एक भी नहीं।। क्या उन सब अनर्थकारियों को कुछ भी ज्ञान नहीं

प्रसंग सहित पढ़ें · भजन संहिता 53

1मूढ़ ने अपने मन में कहा है, कि कोई परमेश्वर है ही नहीं। वे बिगड़ गए, उन्हों ने कुटिलता के घिनौने काम किए हैं; कोई सुकर्मी नहीं।।

2परमेश्वर ने स्वर्ग पर से मनुष्यों के ऊपर दृष्टि की ताकि देखे कि कोई बुद्धि से चलनेवाला वा परमेश्वर को पूछनेवाला है कि नहीं।।

3वे सब के सब हट गए; सब एक साथ बिगड़ गए; कोई सुकर्मी नहीं, एक भी नहीं।। क्या उन सब अनर्थकारियों को कुछ भी ज्ञान नहीं

4जो मेरे लोगों को ऐसे खाते हैं जैसे रोटी और परमेश्वर का नाम नहीं लेते?

5वहां उन पर भय छा गया जहां भय का कोई कारण न था। क्योंकि यहोवा न उनकी हडि्डयों को, जो तेरे विरूद्ध छावनी डाले पड़े थे, तितर बितर कर दिया; तू ने तो उन्हें लज्जित कर दिया इसलिये कि परमेश्वर ने उनको निकम्मा ठहराया है।।

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