क्रोधी मनुष्य का मित्रा न होना, और झट क्रोध करनेवाले के संग न चलना,
22कंगाल पर इस कारण अन्धेर न करता कि वह कंगाल है, और न दीन जन को कचहरी में पीसना;
23क्योंकि यहोवा उनका मुक मा लड़ेगा, और जो लोग उनका धन हर लेते हैं, उनका प्राण भी वह हर लेगा।
24क्रोधी मनुष्य का मित्रा न होना, और झट क्रोध करनेवाले के संग न चलना,
25कहीं ऐसा न हो कि तू उसकी चाल सीखे, और तेरा प्राण फन्दे में फंस जाए।
26जो लोग हाथ पर हाथ मारते, और ऋणियों के उत्तरदायी होते हैं, उन में तू न होना।
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