प्रकाशित वाक्य 18:11

और पृथ्वी के व्यापारी उसके लिये रोएंगे और कलपेंगे क्योंकि अब कोई उन का माल मोल न लेगा।

प्रसंग सहित पढ़ें · प्रकाशित वाक्य 18

9और पृथ्वी के राजा जिन्हों ने उसके साथ व्यभिचार, और सुख- विलास किया, जब उसके जलने का धुआं देखेंगे, तो उसके लिये रोएंगे, और छाती पीटेंगे।

10और उस की पीड़ा के डर के मारे दूर खड़े होकर कहेंगे, हे बड़े नगर, बाबुल! हे दृढ़ नगर, हाय! हाय! घड़ी ही भर में तुझे दण्ड मिल गया है।

11और पृथ्वी के व्यापारी उसके लिये रोएंगे और कलपेंगे क्योंकि अब कोई उन का माल मोल न लेगा।

12अर्थात् सोना, चान्दी, रत्न, मोती, और मलमल, और बैंजनी, और रेशमी, और किरमिजी कपड़े, और हर प्रकार का सुगन्धित काठ, और हाथीदांत की हर प्रकार की वस्तुएं, और बहुमोल काठ, और पीतल, और लोहे, और संगमरमर के सब भांति के पात्रा।

13और दारचीनी, मसाले, धूप, इत्रा, लोबान, मदिरा, तेल, मैदा, गेहूं, गाय, बैल, भेड़, बकरियां, घोड़े, रथ, और दास, और मनुष्य के प्राण।

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