इसलिये व्यवस्था पवित्रा है, और आज्ञा भी ठीक और अच्छी है।
10और वही आज्ञा जो जीवन के लिये थी; मेरे लिये मृत्यु का कारण ठहरी।
11क्योंकि पाप ने अवसर पाकर आज्ञा के द्वारा मुझै बहकाया, और उसी के द्वारा मुझे मार भी डाला।
12इसलिये व्यवस्था पवित्रा है, और आज्ञा भी ठीक और अच्छी है।
14क्योंकि हम जानते हैं कि व्यवस्था तो आत्मिक है, परन्तु मैं शरीरिक और पाप के हाथ बिका हुआ हूं।
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