श्रेष्‍ठगीत 5:7

पहरेवाले जो नगर में घूमते थे, मुझे मिले, उन्हों ने मुझे मारा और घायल किया; शहरपनाह के पहरूओं ने मेरी च र मुझ से छीन ली।

प्रसंग सहित पढ़ें · श्रेष्‍ठगीत 5

5मैं अपने प्रेमी के लिये द्वार खोलने को उठी, और मेरे हाथों से गन्धरस टपका, और मेरी अंगुलियों पर से टपकता हुआ गन्धरस बेण्डे की मूठों पर पड़ा।

6मैं ने अपने प्रेमी के लिये द्वार तो खोला परन्तु मेरा प्रेमी मुड़कर चला गया था। जब वह बोल रहा था, तब मेरा प्राण घबरा गया था मैं ने उसको ढूंढ़ा, परन्तु न पाया; मैं ने उसको पुकारा, परन्तु उस ने कुछ उत्तर न दिया।

7पहरेवाले जो नगर में घूमते थे, मुझे मिले, उन्हों ने मुझे मारा और घायल किया; शहरपनाह के पहरूओं ने मेरी च र मुझ से छीन ली।

8हे यरूशलेम की पुत्रियों, मैं तुम को शपथ धराकर कहती हूं, यदि मेरा प्रेमी तुमको मिल जाए, तो उस से कह देना कि में प्रेम में रोगी हूं।

9हे स्त्रियों में परम सुन्दरी तेरा प्रेमी और प्रेमियों से किस बात में उत्तम है? तू क्यों हम को ऐसी शपथ धराती है?

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