इस कारण चाहिए, कि हम उन बातों पर जो हम ने सुनी हैं और भी मन लगाएं, ऐसा न हो कि बहकर उन से दूर चले जाएं।
1इस कारण चाहिए, कि हम उन बातों पर जो हम ने सुनी हैं और भी मन लगाएं, ऐसा न हो कि बहकर उन से दूर चले जाएं।
2क्योंकि जो वचन स्वर्गदूतों के द्वारा कहा गया था जब वह स्थिर रहा ओर हर एक अपराध और आज्ञा न मानने का ठीक ठीक बदला मिला।
3तो हम लोग ऐसे बड़े उद्धार से निश्चिन्त रहकर क्योंकर बच सकते हैं? जिस की चर्चा पहिले पहिल प्रभु के द्वारा हुई, और सुननेवालों के द्वारा हमें निश्चय हुआ।
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