और याजकों के पुत्रों में से कुछ सुगन्धद्ररयों में गंधी का काम करते थे।
28और उन में से कुछ उपासना के पात्रों के अधिकारी थे, क्योंकि ये गिनकर भीतर पहुंचाए, और गिनकर बाहर तिकाले भी जाते थे।
29और उन में से कुछ सामान के, और पवित्रास्थान के पात्रों के, और मैदे, दाखमधु, तेल, लोबान और सुगन्धद्ररयों के अधिकारी ठहराए गए थे।
30और याजकों के पुत्रों में से कुछ सुगन्धद्ररयों में गंधी का काम करते थे।
31और मतित्याह नाम एक लेवीय जो कोरही शल्लूम का जेठा था उसे बिश्वासयोग्य जानकर तवों पर बनाई हुई वस्तुओं का अधिकारी नियुक्त किया था।
32और उसके भइयों अर्थात कहातियों में से कुछ तो भंटवाली रोटी के अधिकारी थे, कि हर एक विश्रामदिन को उसे तैयार किया करें।
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