तब नामाती सोपर ने कहा,
1तब नामाती सोपर ने कहा,
2मेरा जी चाहता है कि उत्तर दूं, और इसलिये बोलने में फुत करता हूँ।
3मैं ने ऐसी चितौनी सुनी जिस से मेरी निन्दा हुई, और मेरी आत्मा अपनी समझ के अनुसार तुझे उत्तर देती है।
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