तब इन से तुझे जीवन मिलेगा, और ये तेरे गले का हार बनेंगे।
20उसी के ज्ञान के द्वारा गहिरे सागर फूट निकले, और आकाशमण्डल से ओस टपकती है।।
21हे मेरे पुत्रा, ये बातें तेरी दृष्टि की ओट न हाने पाएं; खरी बुद्धि और विवेक की रक्षा कर,
22तब इन से तुझे जीवन मिलेगा, और ये तेरे गले का हार बनेंगे।
23और तू अपने मार्ग पर निडर चलेगा, और तेरे पांव में ठेस न लगेगी।
24जब तू लेटेगा, तब भय न खाएगा, जब तू लेटेगा, तब सुख की नींद आएगी।
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