यह न कहना, बीते दिन इस से क्यों उत्तम थे? क्योंकि यह तू बुद्धिमानी से नहीं पूछता।
8किसी काम के आरम्भ से उसका अन्त उत्तम है; और धीरजवन्त पुरूष गर्वी से उत्तम है।
9अपने मन में उतावली से क्रोधित न हो, क्योंकि क्रोध मूर्खों ही के हृदय में रहता है।
10यह न कहना, बीते दिन इस से क्यों उत्तम थे? क्योंकि यह तू बुद्धिमानी से नहीं पूछता।
11बुद्धि बपौती के साथ अच्छी होती है, वरन जीवित रहनेवालों के लिये लाभकारी है।
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