बैल और गदहा दोनों संग जोतकर हल न चलाना।
8जब तू नया घर बनाए तब उसकी छत पर आड़ के लिये मुण्डेर बनाना, ऐसा न हो कि कोई छत पर से गिर पड़े, और तू अपने घराने पर खून का दोष लगाए।
9अपनी दाख की बारी में दो प्रकार के बीज न बोना, ऐसा न हो कि उसकी सारी उपज, अर्थात् तेरा बोया हुआ बीज और दाख की बारी की उपज दोनों अपवित्रा ठहरें।
10बैल और गदहा दोनों संग जोतकर हल न चलाना।
11ऊन और सनी की मिलावट से बना हुआ वस्त्रा न पहिनना।।
12अपने ओढ़ने के चारों ओर की कोर पर झालर लगाया करना।।
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