प्रकाशित वाक्य 2:3

और तू धीरज धरता है, और मेरे नाम के लिये दु:ख उठाते उठाते थका नहीं।

प्रसंग सहित पढ़ें · प्रकाशित वाक्य 2

1इफिसुस की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि, जो सातों तारे अपने दहिने हाथ में लिए हुए है, और सोने की सातों दीवटों के बीच में फिरता है, वह यह कहता है कि

2मै तेरे काम, और परिश्रम, और तेरा धीरज जानता हूं; और यह भी, कि तू बुरे लोगों को तो देख नहीं सकता; और जो अपने आप को प्रेरित कहते हैं, और हैं नहीं, उन्हें तू ने परखकर झूठा पाया।

3और तू धीरज धरता है, और मेरे नाम के लिये दु:ख उठाते उठाते थका नहीं।

4पर मुझे तेरे विरूद्ध यह कहना है कि तू ने अपना पहिला सा प्रेम छोड़ दिया है।

5सो चेत कर, कि तू कहां से गिरा है, और मन फिरा और पहिले के समान काम कर; और यदि तू मन न फिराएगा, तो मै तेरे पास आकर तेरी दीवट को उस स्थान से हटा दूंगा।

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