सपन्याह 3:10

मेरी तितर- बितर की हुई प्रजा मुझ से बिनती करती हुई मेरी भेंट बनकर आएगी।।

प्रसंग सहित पढ़ें · सपन्याह 3

8इस कारण यहोवा की यह वाणी है, कि जब तक मैं नाश करने को न उठूं, तब तक तुम मेरी बाट जोहते रहो। मैं ने यह ठाना है कि जाति- जाति के और राज्य- राज्य के लोगों को मैं इकट्ठा करूं, कि उन पर अपने क्रोध की आग पूरी रीति से भड़काऊं; क्योंकि सारी पृथ्वी मेरी जलन की आग से भस्म हो जाएगी।।

9और उस समय मैं देश- देश के लोगों से एक नई और शुद्ध भाषा बुलवाऊंगा, कि वे सब के सब यहोवा से प्रार्थना करें, और एक मन से कन्धे से कन्धा मिलाए हुए उसकी सेवा करें।

10मेरी तितर- बितर की हुई प्रजा मुझ से बिनती करती हुई मेरी भेंट बनकर आएगी।।

11उस दिन, तू अपने सब बड़े से बड़े कामों से जिन्हें करके तू मुझ से फिर गई थी, फिर लज्जित न होगी। उस समय मैं तेरे बीच से सब फूले हुए घमण्डियों को दूर करूंगा, और तू मेरे पवित्रा पर्वत पर फिर कभी अभिमान न करेगी।

12क्योंकि मैं तेरे बीच में दीन और कंगाल लोगों का एक दल बचा रखूंगा, और वे यहोवा के नाम की शरण लेंगे।

सपन्याह 3 पूरा पढ़ें

इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें

KJV தமிழ் తెలుగు ಕನ್ನಡ