और जल पृथ्वी पर एक सौ पचास दिन तक प्रबल रहा।।
22जो जो स्थल पर थे उन में से जितनों के नथनों में जीवन का श्वास था, सब मर मिटे।
23और क्या मनुष्य, क्या पशु, क्या रेंगनेवाले जन्तु, क्या आकाश के पक्षी, जो जो भूमि पर थे, सो सब पृथ्वी पर से मिट गए; केवल नूह, और जितने उसके संग जहाज में थे, वे ही बच गए।
24और जल पृथ्वी पर एक सौ पचास दिन तक प्रबल रहा।।
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें