और अपना भोजन जब की रोटियों की नाई बनाकर खाया करना, और उसको मनुष्य की बिष्ठा से उनके देखते दनाया करना।
11पानी भी तू मापकर पिया करना, अर्थात् प्रति दिन हीन का छठवां अंश पीना; और उसको समय समय पर पीना।
12और अपना भोजन जब की रोटियों की नाई बनाकर खाया करना, और उसको मनुष्य की बिष्ठा से उनके देखते दनाया करना।
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