सो जब यह बात घटेगी, और वह निश्चय घटेगी ! तब वे जान लेंगे कि हमारे बीच एक भविष्यद्वक्ता आया था।
31वे प्रजा की नाई तेरे पास आते और मेरी प्रजा बनकर तेरे साम्हने बैठकर तेरे वचन सुनते हैं, परन्तु वे उन पर चलते नहीं; मुंह से तो वे बहुत प्रेम दिखाते हैं, परन्तु उनका मन लालच ही में लगा रहता है।
32और तू उनकी दृष्टि में प्रेम के मधुर गीत गानेवाले और अच्छे बजानेवाले का सा ठहरा है, क्योंकि वे तेरे वचन सुनते तो है, परन्तु उन पर चलते नहीं।
33सो जब यह बात घटेगी, और वह निश्चय घटेगी ! तब वे जान लेंगे कि हमारे बीच एक भविष्यद्वक्ता आया था।
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