तो उस ने उसे अपनी गोद में लिया और परमेश्वर का धन्यवाद करके कहा,
26और पवित्रा आत्मा से उस को चितावनी हुई थी, कि जब तक तू प्रभु के मसीह को देख ने लेगा, तक तक मृत्यु को न देखेगा।
27और वह आत्मा के सिखाने से मन्दिर में आया; और जब माता- पिता उस बालक यीशु को भीतर लाए, कि उसके लिये व्यवस्था की रीति के अनुसार करें।
28तो उस ने उसे अपनी गोद में लिया और परमेश्वर का धन्यवाद करके कहा,
29हे स्वामी, अब तू अपने दास को अपने वचन के अनुसार शान्ति से विदा करता है।
30क्योंकि मेरी आंखो ने तेरे उद्धार को देख लिया है।
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