जब तक दिन ठण्डा न हो और छाया लम्बी होते होते मिट न जाए, तब तक हे मेरे प्रेमी उस चिकारे वा जवान हरिण के समान बन जो बेतेर के पहाड़ों पर फिरता है।
16मेरा प्रमी मेरा है और मैं उसकी हूं, वह अपनी भेड़- बकरियों सोसन फूलों के बीच में चराता है।
17जब तक दिन ठण्डा न हो और छाया लम्बी होते होते मिट न जाए, तब तक हे मेरे प्रेमी उस चिकारे वा जवान हरिण के समान बन जो बेतेर के पहाड़ों पर फिरता है।
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें