चलते समय वे अपनी चारों अलंगों की ओर चल सकते थे, और चलने में मुड़ते नहीं थे।
15जब मैं जीवधारियों को देख ही रहा था, तो क्या देखा कि भूमि पर उनके पास चारों मुखें की गिनती के अनुसार, एक एक पहिया था।
16पहियों का रूप और बनावट फीरोजे की सी थी, और चारों का एक ही रूप था; और उनका रूप और बनावट ऐसी थी जैसे एक पहिये के बीच दूसरा पहिया हो।
17चलते समय वे अपनी चारों अलंगों की ओर चल सकते थे, और चलने में मुड़ते नहीं थे।
18और उन चारों पहियों के घेरे बहुत बड़े और डरावने थे, और उनके घेरों में चारों ओर आंखें ही आंखें भरी हुई थीं।
19और जब जीवधारी चलते थे, तब पहिये भी उनके साथ चलते थे; और जब जीवधारी भूमि पर से उठते थे, तब पहिये भी उठते थे।
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