तब लोग और उनकी स्त्रियों की ओर से उनके भाई यहूदियों के किरूठ्ठ बड़ी चिल्लाहट मची।
1तब लोग और उनकी स्त्रियों की ओर से उनके भाई यहूदियों के किरूठ्ठ बड़ी चिल्लाहट मची।
2कितने तो कहते थे, हम अपने बेटे- बेटियों समेत बहुत प्राणी हैं, इसलिये हमें अन्न मिलना चाहिये कि उसे खाकर जीवित रहें।
3और कितने कहते थे, कि हम अपने अपने खेतों, दाख की बारियों और घरों को महंगी के कारण बन्धक रखते हैं, कि हमें अन्न मिले।
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