परन्तु यहूदियों के पुरनियों के परमेश्वर की दृष्टि उन पर रही, इसलिये जब तक इस बात की चर्चा दारा से न की गई और इसके विषय चिट्ठी के द्वारा उत्तर न मिला, तब तक उन्हों ने इनको न रोका।
4तब हम लोगों से यह कहा, कि इस भवन के बनानेवालों के क्या क्या नाम हैं?
5परन्तु यहूदियों के पुरनियों के परमेश्वर की दृष्टि उन पर रही, इसलिये जब तक इस बात की चर्चा दारा से न की गई और इसके विषय चिट्ठी के द्वारा उत्तर न मिला, तब तक उन्हों ने इनको न रोका।
7उन्हों ने उसको एक चिट्ठी लिखी, जिस में यह लिखा था : कि राजा दारा का कुशल क्षेम सब प्रकार से हो।
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