अपने घर में भांति भांति के, अर्थात् घटती- बढती नपुए न रखना।
12तो उस स्त्री का हाथ काट डालना; उस पर तरस न खाना।।
13अपनी थैली में भांति भांति के अर्थात् घटती- बढ़ती बटखरे न रखना।
14अपने घर में भांति भांति के, अर्थात् घटती- बढती नपुए न रखना।
16क्योंकि ऐसे कामों में जितने कुटिलता करते हैं वे सब तेरे परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में घृणित हैं।।
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