यशायाह 47:6

मैं ने अपनी प्रजा से क्रोधित होकर अपने निज भाग को अपवित्रा ठहराया और तेरे वश में कर दिया; तू न उन पर कुछ दया न की; बूढ़ों पर तू ने अपना अत्यन्त भारी जूआ रख दिया।

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4हमारा छुटकारा देनेवाले का नाम सेनाओं का यहोवा और इस्राएल का पवित्रा है।।

5हे कसदियों की बेटी, चुपचाप बैठी रह और अन्धियारे में जो; क्योंकि तू अब राज्य राज्य की स्वामिन न कहलाएगी।

6मैं ने अपनी प्रजा से क्रोधित होकर अपने निज भाग को अपवित्रा ठहराया और तेरे वश में कर दिया; तू न उन पर कुछ दया न की; बूढ़ों पर तू ने अपना अत्यन्त भारी जूआ रख दिया।

7तू ने कहा, मैं सर्वदा स्वामिन बनी रहूंगी, सो तू ने अपने मन में इन बातों पर विचार न किया और यह भी न सोचा कि उनका क्या फल होगा।।

8इसलिये सुन, तू जो राग- रंग में उलझी हुई निडर बैठी रहती है और मन में कहती है कि मैं ही हूं, और मुझे छोड़ कोई दूसरा नहीं; मैं विधवा की नाईं न बैठूंगी और न मेरे लड़केबोल मिटेंगे।

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