2 राजा 1:15

तब यहोवा के दूत ने उलिरयाह से कहा, उसके संग नीचे जा, उस से पत डर। तब एलिरयाह उठकर उसके संग राजा के पास नीचे गया।

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13फिर राजा ने तीसरी बार पचास सिपाहियों के एक और प्रधान को, पचासों सिपाहियों समेत भेज दिया, और पचास का वह तीसरा प्रधान चढ़कर, एलिरयाह के साम्हने घुटनों के बल गिरा, और गिड़गिड़ा कर उस से कहने लगा, हे परमेश्वर के भक्त मेरा प्राण और तेरे इन पचास दासों के प्राण तेरी दृष्टि में अनमोल ठहरें।

14पचास पचास सिपाहियों के जो दो प्रधान अपने अपने पचासों समेत पहिले आए थे, उनको तो आग ने आकाश से गिरकर भस्म कर डाला, परन्तु अब मेरा प्राण तेरी दृष्टि में अनमोल ठहरे।

15तब यहोवा के दूत ने उलिरयाह से कहा, उसके संग नीचे जा, उस से पत डर। तब एलिरयाह उठकर उसके संग राजा के पास नीचे गया।

16और उस से कहा, यहोवा यों कहता है, कि तू ने तो एक्रोन के बालजबूब देवता से पूछने को दूत भेजे थे तो क्या इस्राएल में कोई परमेश्वर नहीं कि जिस से तू पूछ सके? इस कारण तू जिस पलंग पर पड़ा है, उस पर से कभी न उठेगा, परन्तु मर ही जाएगा।

17यहोवा के इस वचन के अनुसार जो एलिरयाह ने कहा था, वह मर गया। और उसके सन्तान न होने के कारण यहोराम उसके स्थान पर यहूदा के राजा यहोशापात के पुत्रा यहोराम के दूसरे वर्ष में राज्य करने लगा।

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