कौन सह सकता है कि मैं ने अपने हृदय को पवित्रा किया; अथवा मैं पाप से शुद्ध हुआ हूं?
7धर्मी जो खराई से चलता रहता है, उसके पीछे उसके लड़केबाले धन्य होते हैं।
8राजा जो न्याय के सिंहासन पर बैठा करता है, वह अपनी दृष्टि ही से सब बुराई को उड़ा देता है।
9कौन सह सकता है कि मैं ने अपने हृदय को पवित्रा किया; अथवा मैं पाप से शुद्ध हुआ हूं?
10घटती- बढ़ती बटखरे और घटते- बढ़ते नपुए इन दोनों से यहोवा घृणा करता है।
11लड़का भी अपने कामों से पहिचाना जाता है, कि उसका काम पवित्रा और सीधा है, वा नहीं।
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