ओबद्दाह 1:14

तुझे उचित न था कि तिरमुहाने पर उसके भागनेवालों को मार डालने के लिये खड़ा होता, और संकट के दिन उसके बचे हुओं को पकड़ाता।।

प्रसंग सहित पढ़ें · ओबद्दाह 1

12परन्तु तुझे उचित न था कि तू अपने भाई के दिन में, अर्थात् उसकी विपत्ति के दिन में उसकी ओर देखता रहता, और यहूदियों के नाश होने के दिन उनके ऊपर आनन्द करता, और उनके संकट के दिन बड़ा बोल बोलता।

13तुझे उचित न था कि मेरी प्रजा की विपत्ति के दिन तू उसके फाटक से घुसता, और उसकी विपत्ति के दिन उसकी धन सम्पत्ति पर हाथ लगाता।

14तुझे उचित न था कि तिरमुहाने पर उसके भागनेवालों को मार डालने के लिये खड़ा होता, और संकट के दिन उसके बचे हुओं को पकड़ाता।।

15क्योंकि सारी अन्यजातियों पर यहोवा के दिन का आना निकट है। जैसा तु ने किया है, वैसा ही तुझ से भी किया जाएगा, तेरा व्यवहार लौटकर तेरे ही सिर पर पड़ेगा।

16जिस प्रकार तू ने मेरे पवित्रा पर्वत पर पिया, उसी प्रकार से सारी अन्यजातियां लगातार पीती रहेंगी, वरन वे सुड़क- सुड़ककर पीएंगी, और एसी हो जाएंगी जैसी कभी हुई ही नहीं।

ओबद्दाह 1 पूरा पढ़ें

इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें

KJV தமிழ் తెలుగు ಕನ್ನಡ