मेरे सिर पर से जल बह गया, मैं ने कहा, मैं अब नाश हो गया।
52जो व्यर्थ मेरे शत्रु बने हैं, उन्हों ने निर्दयता से चिड़िया के समान मेरा आहेर किया है;
53उन्हों ने मुझे गड़हे में डालकर मेरे जीवन का अन्त करने के लिये मेरे ऊपर पत्थर लुढ़काए हैं;
54मेरे सिर पर से जल बह गया, मैं ने कहा, मैं अब नाश हो गया।
55हे यहोवा, गहिरे गड़हे में से मैं ने तुझ से प्रार्थना की;
56तू ने मेरी सुनी कि जो दोहाई देकर मैं चिल्लाता हूँ उस से कान न फेर ले !
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