राजा को उत्तर दिया, जिस मनुष्य की प्रतिष्ठा राजा करना चाहे,
5तब राजा के सेवकों ने उस से कहा, आंगन में तो हामान खड़ा है। राजा ने कहा, उसे भीतर बुलवा लाओ।
6जब हामान भीतर आया, तब राजा ने उस से पूछा, जिस मनुष्य की प्रतिष्ठा राजा करना चाहता हो तो उसके लिये क्या करना उचित होगा? हामान ने यह सोचकर, कि मुझ से अधिक राजा किस की प्रतिष्ठा करना चाहता होगा?
7राजा को उत्तर दिया, जिस मनुष्य की प्रतिष्ठा राजा करना चाहे,
8तो उसके लिये राजकीय वस्त्रा लाया जाए, जो राजा पहिनता है, और एक घेड़ा भी, जिस पर राजा सवार होता है, ओर उसके सिर पर जो राजकीय मुकुट धरा जाता है वह भी लाया जाए।
9फिर वह वस्त्रा, और वह घेड़ा राजा के किसी बड़े हाकिम को सौंपा जाए, और जिसकी प्रतिष्ठा राजा करना चाहता हो, उसको वह वस्त्रा पहिनाया जाए, और उस घोड़े पर सवार करके, नगर के चौक में उसे फिराया जाए; और उसके आगे आगे यह प्रचार किया जाए, कि जिसकी प्रतिष्ठा राजा करना चाहता है, उसके साथ ऐसा ही किया जाएगा।
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