दक्खिन दिशा से बवणडर और उतरहिया से जाड़ा आता है।
7वह सब मनुष्यों के हाथ पर मुहर कर देता है, जिस से उसके बनाए हुए सब मनुष्य उसको पहचानें।
8तब वनपशु गुफाओं में घुस जाते, और अपनी अपनी मांदों में रहते हैं।
9दक्खिन दिशा से बवणडर और उतरहिया से जाड़ा आता है।
10ईश्वर की श्वास की फूंक से बरफ पड़ता है, तब जलाशयों का पाट जम जाता है।
11फिर वह घटाओं को भाफ़ से लादता, और अपनी बिजली से भरे हुए उजियाले का बादल दूर तक फैलाता है।
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