क्या हमें कैसर को कर देना उचित है, कि नहीं।
20और वे उस की ताक में लगे और भेदिये भेजे, कि धर्म का भेष धरकर उस की कोई न कोई बात पकड़ें, कि उसे हाकिम के हाथ और अधिकार में सौंप दें।
21उन्हों ने उस से यह पूछा, कि हे गुरू, हम जानते हैं कि तू ठीक कहता, और सिखाता भी है, और किसी का पक्षपात नहीं करता; बरन परमेश्वर का मार्ग सच्चाई से बताता है।
22क्या हमें कैसर को कर देना उचित है, कि नहीं।
23उस ने उन की चतुराई को ताड़कर उन से कहा; एक दीनार मुझे दिखाओ।
24इस पर किस की मूर्त्ति और नाम है? उन्हों ने कहा, कैसर का।
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