क्योंकि अन्त में वह सर्प की नाई डसता है, और करैत के समान काटता है।
30उनकी जो दाखमधु देर तक पीते हैं, और जो मसाला मिला हुआ दाखमधु ढूंढ़ने को जाते हैं।
32क्योंकि अन्त में वह सर्प की नाई डसता है, और करैत के समान काटता है।
33तू विचित्रा वस्तुएं देखेगा, और उल्टी- सीधी बातें बकता रहेगा।
34और तू समुद्र के बीच लेटनेवाले वा मस्तूल के सिरे पर सोनेवाले के समान रहेगा।
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें