और उस की घात में लगे रहे, कि उसके मुंह की कोई बात पकड़ें।।
52हाय तुम व्यवस्थापकों पर ! कि तुम ने ज्ञान की कुंजी ले तो ली, परन्तु तुम ने आपही प्रवेश नहीं किया, और प्रवेश करनेवालों को भी रोक दिया।
53जब वह वहां से निकला, तो शास्त्री और फरीसी बहुत पीछे पड़ गए और छेड़ने लगे, कि वह बहुत सी बातों की चर्चा करे।
54और उस की घात में लगे रहे, कि उसके मुंह की कोई बात पकड़ें।।
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