और यह भी कि मैं उस के विषय में जैसा मुझे चाहिए हियाव से बोलूं।।
18और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और बिनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्रा लोगों के लिये लगातार बिनती किया करो।
19और मेरे लिये भी, कि मुझे बोलने के समय ऐसा प्रबल वचन दिया जाए, कि मैं हियाव से सुसमाचार का भेद बता सकूं जिस के लिये मैं जंजीर से जकड़ा हुआ राजदूत हूं।
20और यह भी कि मैं उस के विषय में जैसा मुझे चाहिए हियाव से बोलूं।।
21और तुखिकुस जो प्रिय भाई और प्रभु में विश्वासयोग्य सेवक है तुम्हें सब बातें बताएगा, कि तुम भी मेरी दशा जानो कि मैं कैसा रहता हूं।
22उसे मैं ने तुम्हारे पास इसी लिये भेजा है, कि तुम हमारी दशा जानो, और वह तुम्हारे मनों को शान्ति दे।।
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