श्रेष्‍ठगीत 6:13

लौट आ, लौट आ, हे शूलम्मिन, लौट आ, लौट आ, कि हम तुझ पर दृष्टि करें।। क्या तुम शूलेम्मिन को इस प्रकार देखोगे जैसा महनैम के नृत्य को देखते हो?

प्रसंग सहित पढ़ें · श्रेष्‍ठगीत 6

11मैं अखरोट की बारी में उत्तर गई, कि तराई के फूल देखूं, और देखूं की दाखलता में कलियें लगीं, और अनारों के फूल खिले कि नहीं।

12मुझे पता भी न था कि मेरी कल्पना ने मुझे अपने राजकुमार के रथ पर चढ़ा दिया।।

13लौट आ, लौट आ, हे शूलम्मिन, लौट आ, लौट आ, कि हम तुझ पर दृष्टि करें।। क्या तुम शूलेम्मिन को इस प्रकार देखोगे जैसा महनैम के नृत्य को देखते हो?

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